अनिल कपूर : रोल पाने के लिए सुभाष घई का पीछा करने के साथ जूठे कप-प्लेट्स भी उठाए

अनिल कपूर : रोल पाने के लिए सुभाष घई का पीछा करने के साथ जूठे कप-प्लेट्स भी उठाए

बॉलीवुड में अनिल कपूर आज भी कई युवा सितारों को अपने पीछे छोड़ देते हैं और उन्हें फिट रहने के लिए प्रेरित करते हैं। चेम्बूर में बचपन बिताने वाले अनिल कपूर ने जब से होश संभाला था सिर्फ एक्टर बनने का ही सपना देखा था। उनके पिता सुरिंदर कपूर राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर के कजिन थे। पृथ्वीराज ने ही उन्हें मुम्बई की फिल्मी दुनिया का हिस्सा बनने के लिए इनवाइट किया था। अनिल कपूर के पिता गीता बाली जैसी नायिका के सेक्रेटरी के रूप में काम करते रहे फिर उन्होंने खुद की प्रोडक्शन हाउस बना ली और फिल्में निर्माण करने लगे।

शूट के पहले दिन लगे मेकपक को बिना धोए स्कूल पहुंचे थे अनिल

अनिल कपूर जब 11-12 वर्ष के रहे होंगे तब उन्हें पहली बार कैमरे के सामने आने का मौका मिला था। शशि कपूर की ‘तू पायल मैं गीत’ नामक फ़िल्म आज तक रिलीज नही हुई। इस फ़िल्म में अनिल ने शशि के बचपन का किरदार निभाया था। उस फिल्म के लिए उन्हें सितार वादन भी करना था। कुछ दिनों तक सितार सीखने के लिए वे कई बसें बदलकर गुरु के पास जाते थे। जब पहली बार उनके चेहरे पर मेकअप लगा तो उन्हें बेहद खुशी हुई।

घर पहुंचने के बाद भी उन्होंने मेकअप नही धोया और अगली सुबह बिना मेकअप उतारे ही स्कूल चले गए। वे अपने दोस्तों को अपना मेकअप दिखाना चाहते थे। इस फ़िल्म में उन्होंने प्राण के साथ अभिनय किया था।

एफटीआई की प्रवेश परीक्षा में फेल होने पर निर्देशक के आफिस पहुंच गए

चेम्बूर में बचपन बिताने वाले अनिल कपूर वहाँ नंगे पाँव ही दौड़ा करते थे। उनका एक ही सिद्धांत है कि कोई भी काम बड़ा या छोटा नही होता। वे सभी कामों की इज्जत करते हैं। जब उन्होंने यह पक्का कर लिया कि बनना तो नायक ही है। तब उन्होंने एफटीआई (Film and Television Institute Of India) की प्रवेश परीक्षा दिलाई। स्कूल मे किसी भी एग्जाम में फेल न होने वाले अनिल कपूर एफटीआई एग्जाम पास नही कर सके। उन दिनों गिरीश कर्नाड एफटीआई के निर्देशक हुआ करते थे। अनिल उनके पास पहुंच गए और उनके हाथ पांव जोड़ने शुरू कर दिए। उनका कोई नुस्खा काम नही आया और वे कई रातों तक रोते रहे। उन्हें लगा कि वे अब अभिनय नही बन पाएँगे।

होम प्रोडक्शन फ़िल्म में जूठे कप-प्लेट्स उठाने का काम भी किया

अनिल कपूर के पिता हम पाँच फ़िल्म का निर्माण कर रहे थे और तभी उनकी तबियत बिगड़ी। उनके बेटों को उस फिल्म का काम अपने सर लेना पड़ा। इस फ़िल्म में अनिल कपूर ने जी जान लगा दिया। वे नसीरुद्दीन और मिथुन जैसे सितारों को पिकअप करने से लेकर चाय-नाश्ता परोसने के बाद जूठी कप-प्लेट्स भी उठाने का काम करते थे। भीड़ में एक्स्ट्रास का काम और शूटिंग में आये लोगों को सीमा के बाहर रखने का काम भी करते थे। उस फ़िल्म में अनिल ने बेहद छोटा सा रोल भी किया था।

‘हम पांच’ हिट हुई और उनके पिता के अगले फ़िल्म में अनिल कपूर को प्रेम प्रताप पटियाला वाले के किरदार से खूब प्रसिद्धि मिल गई।

क्रोधी में रोल पाने के लिए कई दिनों तक किया सुभाष घई का पीछा

अनिल कपूर एक निर्देशक के साथ बुरी तरह से ऑब्सेस्ड हो गए थे। वे किसी भी हाल में सुभाष घई की फिल्मों में दिखना चाहते थे। उन्हें जब पता लगा कि सुभाष घई जट्ट धर्मेंद्र और बोल्ड एक्ट्रेस ज़ीनत अमान को लेकर फ़िल्म क्रोधी (1981) की तैयारी कर रहे हैं तब उन्होंने सुभाष जी को स्टॉक करना शुरू कर दिया। सुभाष घई जहां जाते, अनिल उनके पीछे जाते। कभी आफिस के बाहर जाकर खड़े रहते तो कभी भीड़ में उनका पीछा करते। सुभाष घई ने नोटिस कर दिया कि कोई लड़का पागलों की तरह उनके पीछे लगा हुआ है। बाद में 1985 में आई मेरी जंग में सुभाष ने अनिल को कास्ट किया था।

पहली फ़िल्म शुरू करने के लिए शबाना आज़मी ने दिए थे पैसे

अनिल कपूर ने ‘हमारे तुम्हारे’, ‘एक बार कहो’, ‘हम पांच’, और शक्ति जैसी फिल्मों में कैमिया कर चुके थे। इसके साथ ही वे साउथ की फिल्मों में भी छोटे-मोटे रोल कर रहे थे। 1983 में उनकी वो सात दिन रिलीज हुई थी।

यह 1981 की तमिल फिल्म ‘अंधा 7 नाटकल’ की हिंदी रीमेक थी। नसीर ने इसमें कैमिया किया था। इस फ़िल्म को शुरू करने के लिए शबाना आज़मी और संजीव कुमार ने कुछ पैसे उधार दिए थे। फ़िल्म के किरदार को लेकर अनिल कपूर परेशान थे। उन्हें लगा था कि वे इस तरह के किरदार को नही कर पाएंगे। निर्देशक बापू ने उन पर विश्वास रखा। फ़िल्म हिट हुई और 1984 में उनकी दिलीप कुमार के साथ मशाल रिलीज हो गई। इन दिनों फ़िल्म की सफलता के बाद से लोग उनकी तुलना अमिताभ बच्चन के साथ करने लगे थे। लोगों का इतना प्यार देखकर अनिल कपूर हैरान रह गए थे।

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